सीकर, राजस्थान
किसानों को सोलर पंप लगाने के लिए कुल लागत का केवल 10% ही देना होता है, बाकी 60% सब्सिडी सरकार और 30% लोन बैंक से मिलता है। इससे खेती में बिजली का खर्च लगभग शून्य हो जाता है।

कृपया नीचे दिए गए फॉर्म को भरकर अपना आवेदन भेजें।
केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई पीएम Kusum Solarा का उद्देश्य है किसानों को फ्री बिजली और सोलर पंप की सुविधा देना, ताकि वे समय पर सिंचाई कर सकें और फसलों की बेहतर पैदावार ले सकें। सरकार आने वाले वर्षों में 17.5 लाख डीजल पंप और 3 करोड़ सिंचाई पंपों को सोलर में बदलने का लक्ष्य लेकर चल रही है। जो किसान ग्रिड के ज़रिए बिजली भेजते हैं, उन्हें उसकी कीमत भी मिलेगी।
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प्रधानमंत्री Kusum Solarा के घटक
यदि कोई व्यक्ति अपनी लागत पर सोलर यूनिट लगाता है, तो उसे ₹1,00,000 प्रति मेगावाट की दर से धरोहर राशि जमा करनी होगी। यह राशि डिमांड ड्राफ्ट या बैंक गारंटी के रूप में होगी और इसकी वैधता कम से कम 6 महीने होनी चाहिए।
सफल आवेदकों से प्रोजेक्ट के लिए ₹5,00,000 प्रति मेगावाट की सिक्योरिटी ली जाती है। यह रकम 15 दिनों के भीतर जमा करनी होती है और प्रोजेक्ट शुरू होने के 1 महीने बाद वापस कर दी जाती है। PPA साइन होने के 15 दिनों में पहले जमा की गई धरोहर राशि भी रिफंड कर दी जाती है।
किसान अब सोलर पंप से जब चाहें, खेतों की सिंचाई कर सकते हैं — बिजली कटौती या डीजल खर्च की चिंता नहीं। इससे पैदावार बेहतर हो रही है और मंडियों में फसल का अच्छा दाम मिल रहा है।
योजना के तहत किसानों को 3 से 7.5 HP तक के सोलर पंप मिलते हैं। इसके लिए उन्हें निम्नलिखित अमाउंट जमा करनी होती है।
राशि जमा करने के बाद ही पंप की स्थापना की जाती है।
आवेदन के बाद, अधिकृत कंपनी (SPG) को विभाग द्वारा 9 महीने के भीतर सोलर यूनिट स्थापित करनी होती है। यदि समय पर कार्य पूरा नहीं होता या दस्तावेज़ फर्जी पाए जाते हैं, तो आवेदन रद्द किया जा सकता है और पेनल्टी भी लग सकती है।
प्रधानमंत्री Kusum Solarा का लाभ अब देशभर के किसान उठा सकते हैं। इस योजना के तहत बेहद कम कीमत पर सोलर सिंचाई पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे किसान डीजल और बिजली की परेशानी से मुक्त हो सकें। पहले चरण में सरकार ने 17 लाख डीजल पंपों को सोलर में बदलने और 10 लाख से अधिक सोलर पंपों के अपग्रेडेशन का लक्ष्य रखा है। किसानों को केवल 10% भुगतान करना होता है, शेष लागत सरकार (60%) और बैंक (30%) वहन करते हैं। यह योजना विशेष रूप से कम बारिश और बिजली संकट वाले राज्यों के किसानों के लिए फायदेमंद है। सोलर प्लांट लगने से उन्हें 24 घंटे बिजली मिल सकती है और अतिरिक्त बिजली बेचकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकते हैं। साथ ही, बंजर जमीन पर सोलर यूनिट लगाने से उसकी भी उपयोगिता बढ़ती है।
किसानों को सोलर पंप लगाने के लिए कुल लागत का केवल 10% ही देना होता है, बाकी 60% सब्सिडी सरकार और 30% लोन बैंक से मिलता है। इससे खेती में बिजली का खर्च लगभग शून्य हो जाता है।
सोलर पैनल से जो अतिरिक्त बिजली बनेगी, उसे किसान सरकारी या निजी बिजली कंपनियों को बेच सकते हैं, जिससे उन्हें हर साल हजारों रुपये की कमाई हो सकती है।
योजना का लाभ उठाने के लिए व्यक्ति का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है।
इस योजना का लाभ व्यक्तिगत किसान, किसानों के समूह, पंचायतें, सहकारी समितियाँ, किसान उत्पादक संगठन (FPO) और जल उपभोक्ता समूह उठा सकते हैं।
जो भी व्यक्ति सोलर प्लांट लगाना चाहता है, उसके पास प्रति मेगावाट के हिसाब से लगभग 2 हेक्टेयर भूमि होना जरूरी है।
आवेदन करने वाले के पास सभी जरूरी दस्तावेज जैसे पहचान प्रमाण, भूमि दस्तावेज, बैंक पासबुक और फोटो होना आवश्यक है।